जुगनू की तरह

जुगनू की तरह

जुगनू की तरह
मैं अँधेरे से डरता नहीं,
क्योंकि मैंने सीख लिया है
कि रोशनी बाहर नहीं,
अंदर जलती है।

जुगनू की तरह
मेरी चमक भी स्थायी नहीं,
वह क्षणों में आती है,
क्षणों में खो जाती है,
लेकिन जब आती है
तो अँधेरा ठहर कर देखता है।

इस संसार में
जहाँ सूरज भी कभी-कभी
थक कर ढल जाता है,
जहाँ सपनों पर
धूल जम जाती है,
वहाँ जुगनू की तरह
छोटी रोशनी
बड़ा साहस बन जाती है।

जुगनू की तरह
मैंने शोर नहीं चुना,
मैंने चमक-दमक नहीं चुनी,
मैंने बस
सच की हल्की लौ को
सीने में सहेज लिया।

क्योंकि
बड़ी रोशनियाँ अक्सर
आँखें चुँधिया देती हैं,
पर जुगनू की तरह
जो उजाला होता है,
वह रास्ता दिखाता है।

जुगनू की तरह
मेरी उड़ान भी सीमित है,
मैं आसमान नहीं नापता,
मैं बस
अपने हिस्से की रात
रोशन करता हूँ।

हर कोई चाँद बनना चाहता है,
कोई यह नहीं पूछता
कि जुगनू होना
कितना जरूरी है।
जब जंगल घना हो,
जब डर गहरा हो,
तब जुगनू की तरह
एक छोटी रोशनी
पूरा भरोसा बन जाती है।

जुगनू की तरह
मैंने हार से दोस्ती की है,
क्योंकि हर बुझना
एक नई चमक की तैयारी है।
हर अँधेरा
रोशनी की परीक्षा है,
और हर परीक्षा
मुझे और सच्चा बनाती है।

लोग कहते हैं
इतनी कम रोशनी से
क्या बदलेगा?
मैं मुस्कुरा देता हूँ,
क्योंकि
जुगनू की तरह
मैं जानता हूँ—
अँधेरे को हटाने के लिए
पूरा सूरज नहीं चाहिए।

जुगनू की तरह
मेरी कहानी भी
कोई शोर नहीं करती,
वह बस
चुपचाप
दिलों में उतर जाती है।

जब कोई थका हुआ मन
रुक जाता है,
जब कोई सपना
चलने से मना कर देता है,
तब जुगनू की तरह
एक विचार
फिर से चलना सिखाता है।

जुगनू की तरह
मैं तुलना नहीं करता,
मैं प्रतिस्पर्धा नहीं करता,
मैं बस
खुद से वादा निभाता हूँ—
कि चाहे जितनी भी रात हो,
मैं बुझूँगा नहीं।

यह जीवन भी
एक लंबी रात है,
कभी साफ,
कभी तूफानी।
यहाँ जुगनू की तरह
चलते रहना ही
जीत है।

हर बार जब
असफलता की हवा
मेरी लौ को हिलाती है,
मैं उसे कसकर
थाम लेता हूँ।
क्योंकि
जुगनू की तरह
मेरी रोशनी
मेरी पहचान है।

जुगनू की तरह
मैं दूसरों को
नीचा दिखाकर
ऊँचा नहीं बनता।
मैं बस
अपने उजाले से
दूसरों को
देखने लायक बनाता हूँ।

यह कविता
किसी महल के लिए नहीं,
यह उन रास्तों के लिए है
जो बिना लाइट के हैं।
यह उन लोगों के लिए है
जो जुगनू की तरह
खुद को छोटा समझते हैं।

सुनो—
छोटा होना कमजोरी नहीं,
चुपचाप चमकना
हार नहीं।
जुगनू की तरह
जलते रहना
सबसे बड़ा साहस है।

अगर तुम थक गए हो,
अगर तुम्हें लगता है
कि तुम्हारी रोशनी
काफी नहीं,
तो जंगल को याद करना,
रात को याद करना,
और जुगनू की तरह
एक बार फिर
खुद को जलाना।

क्योंकि
दुनिया को
और सूरज नहीं चाहिए,
दुनिया को चाहिए
जुगनू की तरह
सच्ची,
ईमानदार,
निडर रोशनी।

और अगर तुम पूछो
कि मैं कौन हूँ—
तो मेरा जवाब
बस इतना है:
मैं भी
जुगनू की तरह हूँ।

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